বিশ্ব রোজ দিবস: বিশ্ব রোজ দিবস কেন উদযাপিত হয়, ক্যান্সার কী, এর সমিতি কী তা জেনে নিন


বিশ্ব রোজ দিবস: বিশ্ব রোজ দিবস কেন উদযাপিত হয়, ক্যান্সার কী, এর সমিতি কী তা জেনে নিন

বিশ্ব রোজ দিবস ২৫ সেপ্টেম্বর বিশ্ব রোজ দিবস হিসাবে পালিত হয়। এর উদ্দেশ্য ক্যান্সার আক্রান্তদের দুর্ভোগ ভাগ করে নেওয়া।

নয়াদিল্লি বিশ্ব গোলাপ দিবস: गुलाब का फूल की चर्चा अक्सर वैलेनटाइन डे के दिन होता है। हम इसे कपल्स से जोड़कर देखते हैं। लेकिन इससे अलग कैंसर पीड़ितों में मानवीय व्यवहार और उनका दुख बाटने के लिए भी किया जाता है। जी हां, 25 सितंबर को वर्ल्ड रोज डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कैंसर पीड़ितों का दुख बांटना है। ऐसे में आप भी कैंसर पीड़ित लोगों से उनका दर्द बांट सकते हैं। आप इस रोज डे के दिन हैंड-मेड गुलाब का फूल, गिफ्ट और कार्ड्स कैंसर मरीजों को दे सकते हैं।

जिंदगी की शुरुआत

वर्ल्ड रोज डे के दिन कैंसर पीड़ितों को फूल देकर यह संदेश दिया जाता है कि अभी जिंदगी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में रोज-डे में फूल देकर बताया जाता है कि यह एक शुरुआत है। अक्सर कैंसर मरीज इस बीमारी की जिंदगी का अंत मान लेते हैं। लेकिन आप बता सकते हैं कि कैंसर से लड़ा जा सकता है। जिंदगी को की शुरआत की जा सकती है।

ऐसे हुई थी शुरुआत

वर्ल्ड रोज-डे कनाडा की एक बच्ची मेलन्डा की याद में मनाया जाता है। 12 वर्षीय इस बच्ची को जब कैंसर हुआ, तब डॉक्टर ने अपने हाथ खड़े कर दिए। सास 1994 में जब मेलन्डा को बल्ड कैंसर हुआ, तब डॉक्टर ने कहा कि बच्ची 2 हफ्ते ज्यादा नहीं जी पाएगी। इस बच्ची ने हार नहीं मानी। कैंसर के साथ पूरे 6 महीने तक जंग लड़ी। बच्ची ने डॉक्टर्स को गलत साबित कर दिया है। ऐसे में जब सितंबर महीने बच्ची की मौत हुई, तो इसे कैंसर खिलाफ जंग के तौर पर मनाने की शुरुआत हुई। यहीं से वर्ल्ड रोज -डे की शुरुआत हुई।

 

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